Beauty health
सौन्दर्य चाहिए तो स्वास्थ्य बचाइए😊
कृत्रिम सौन्दर्य प्रसाधनों से सावधान:-(२)
महिलाओं के होठों के काले पड़ जाने के पीछे भी सबसे बड़ा कारण रसायन मिश्रित लिपिस्टिक ही है। लिपिस्टिक में कई तरह के अघुलनशील एवं अखाद्य रंग आदि पदार्थ मिले होते हैं। इनमें मिलाए जाने वाले मोम, सीसा और कैडमियम जैसे पदार्थ भी शरीर के लिए नुकसानदेह ही होते हैं। ये पदार्थ होठों के सहारे पेट में पहुँचते हैं तो शारीरिक विकृतियों, एलर्जी तथा कैंसर जैसे रोगों के कारण बनते हैं।
यह भी एक भ्रम है कि सख़्त नाखुनो के ऊपर लगे होने के कारण नेल पालिश से कोई नुकसान नहीं हो पाता। वास्तव में नेल पालिश में कई तरह के जटिल रसायन मिले होते हैं। ऐसे में इसके नियमित इस्तेमाल से नाख़ून रोगग्रस्त हो सकते हैं। नेल पालिश नाखुनो की प्राकृतिक चमक को तो नष्ट करता ही है, वे कमज़ोर होकर टूटने लगते हैं और खुरदुरेपन के शिकार भी हो सकते हैं। इसी तरह नेल पालिश रिमूवर के इस्तेमाल से भी नाख़ून और समीप की त्वचा पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
सुहाग के प्रतीक के तौर पर प्रयोग किया जाने वाला सिन्दूर आज जिस तरह से बनाया जाता है वह भी कम घातक नहीं है। सिन्दूर में प्राय: बेहद ख़तरनाक क़िस्म का रसायन लेड आक्साइड मिला होता है। इसका विषैला प्रभाव कैंसरकारक तो है ही, यह रक्त में पहुँचकर हीमोग्लोबिन के निर्माण को प्रभावित करके रक्ताल्पता भी पैदा कर सकता है। गर्भस्थ शिशु भी इससे प्रभावित हो सकता है। इसलिए एक तो महिलाएं रसायन मिश्रित सिन्दूर की जगह माँग में प्राकृतिक लालिमा लगाएं तो अति उत्तम; अन्यथा, सिन्दूर लगाएं भी तो कम से कम मात्रा में लगाएं और जिस हाथ से लगाएं उस हाथ को अच्छी तरह से अवश्य धो लें। सिन्दूर की ही भाँति आजकल बाज़ारों में बिकने वाला सुरमा भी अक्सर अपमिश्रित होता है। आजकल के सुरमा निर्माता कम लागत में ज़्यादा मुनाफ़ा बटोरने के लोभ में प्राकृतिक उपादानों के बजाय लेड सल्फाइड जैसे ज़हरीले रसायन इस्तेमाल करने लगे हैं। लगभग ऐसा ही हाल काजल का भी है। आँखें कजरारी करने के चक्कर में कई बार आँखों की रोशनी तक चली जा सकती है। बेहतर है कि काजल या सुरमा घर में ही शुद्धता से बना लिया जाय। बाज़ार से ख़्ारीदना पड़े तो विश्वसनीय आयुर्वेदिक सुरमा या काजल ही लेना चाहिए। माथे पर लगाई जाने वाली छोटी सी बिन्दी के पीछे चिपकाने के लिए लगा गोंद अगर अच्छे दजऱ्ें का न हो तो वह भी नुकसानदेह हो सकता है। जहाँ बिन्दी चिपकाई जाती है वहाँ की खाल उधड़ सकती है, खुजली हो सकती है और दूसरे क़िस्म के चर्मरोग भी हो सकते हैं। इसलिए बिन्दी लगाने में भी सावधानी बरतने की ज़रूरत है।
तमाम तरह के सुगन्धित सौन्दर्य प्रसाधन शरीर के लिए हानिकारक होते हैं। इस तरह के प्रसाधनों के निर्माण में लगभग 5000 प्रकार के घटक द्रव्य इस्तेमाल किए जाते हैं। इनमें से कोई भी घटक त्वचा में एलर्जी, जलन या विकार पैदा कर सकता है। आजकल पसीना निरोधक प्रसाधनों का व्यापक उपयोग होने लगा है। ऐसे प्रसाधनों को लगाने से त्वचा के रोमछिद्र बन्द हो जाते हैं और पसीने के जरिए शरीर के विजातीय तत्त्व बाहर नहीं निकल पाते। नतीजन ,त्वचा पर बुरा असर तो होता ही है, गुर्दों पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ता है और वे विकारग्रस्त हो सकते हैं। ऐसे प्रसाधनों में प्राय: आक्सीक्विनोलिन सल्फा नामक रसायन मिला रहता है जो केन्द्रीय नाड़ी संस्थान पर बुरा प्रभाव डालता है। इसके अलावा इस तरह के प्रसाधनों में जिंक सल्फोकार्बोनेट, प्रोपेलिन ग्लाइकोल, कास्टिक, बेंजोइक अम्ल, फ्लोरल हाइड्रेट तथा फार्मेल्डिहाइड जैसे हानिकारक रसायन भी मिले होते हैं, जो त्वचा में जलन, एलर्जी या दूसरी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। इनमें से फार्मेल्डिहाइड शैम्पू, एण्टिसेप्टिक क्रीम, प्रिजर्वेटिव, नाखुनो को सख़्त बनाने वाले घोलों, स्नानघर में प्रयुक्त होने वाले पदार्थों आदि में भी मिलाया जाता है। इसका विषैला प्रभाव कैंसर रोगियों की संख्या में बढ़ोत्तरी कर रहा है।(२)
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